डिंडोरी। क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, डिंडोरी में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के मार्गदर्शन में फसल विविधीकरण एवं सतत कृषि प्रणाली विषय पर दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 19 जनवरी से प्रारंभ किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रथम दिवस सोमवार को संपन्न हुआ, जिसमें जिले के अमरपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मोहगांव से आए किसानों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ पंजीयन एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। प्रशिक्षण सत्रों में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को बताया गया कि वर्तमान समय में केवल एक फसल पर निर्भर रहना जोखिमपूर्ण है। फसल विविधीकरण अपनाकर किसान उत्पादन लागत घटाते हुए अधिक उत्पादन एवं बेहतर आय प्राप्त कर सकते हैं। दलहन, तिलहन, मोटे अनाज एवं सब्जी फसलों को खेती में सम्मिलित कर आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित किए जा सकते हैं।
तकनीकी सत्रों के दौरान किसानों को कीट, रोग एवं खरपतवार प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य सुधार, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, दलहनी एवं तिलहनी फसलों की उन्नत किस्में, अंतरवर्तीय फसल प्रणाली, बीजोपचार, कटाई-गहाई एवं भंडारण से संबंधित वैज्ञानिक जानकारियां प्रदान की गईं।
कार्यक्रम में कृषक-वैज्ञानिक संवाद आयोजित किया गया, जिसमें किसानों ने अपनी खेती से जुड़ी समस्याएं रखीं। वैज्ञानिकों ने समस्याओं के व्यावहारिक समाधान बताते हुए आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने की सलाह दी।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत आयोजित किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. नम्रता जैन, विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक (सस्य विभाग), जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर रहीं।
कार्यक्रम में क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, डिंडोरी की प्रभारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनीषा श्याम, कृषि विज्ञान केंद्र डिंडोरी के केंद्र प्रभारी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पी. एल. अंबुलकर, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विकास गुप्ता, डॉ. गीता सिंह सहित प्रक्षेत्र विस्तार अधिकारी श्रीमती आस्था प्रधान मरावी, बी.पी. कुरुल, सुनील मालवीय, दीपक मार्को, एसआरएफ प्रज्ञा पटले, प्रक्षेत्र सहायक पृथु कुमार एवं रवि अहिरवार उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण में सम्मिलित किसानों ने कार्यक्रम को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए नई तकनीकी जानकारी प्राप्त हुई है। आयोजकों के अनुसार ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जिले में फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों की आय में वृद्धि होगी।