भोपाल। सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत मांगी गई जानकारी निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध नहीं कराने के मामले में राज्य सूचना आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने सूचना प्रदान करने में लगभग दो वर्ष की देरी को गंभीर लापरवाही मानते हुए तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) जगन्नाथ मरकाम को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
प्रकरण में आयोग के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि आवेदक द्वारा नियमानुसार सूचना का आवेदन प्रस्तुत किए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारी द्वारा समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। आयोग ने प्रथम दृष्टया इसे सूचना के अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन माना है।
राज्य सूचना आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम नागरिकों को समयबद्ध, पारदर्शी एवं जवाबदेह सूचना उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लागू किया गया है। ऐसे मामलों में अधिकारियों द्वारा की गई लापरवाही को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
आयोग ने नोटिस के माध्यम से तत्कालीन ASP से निर्धारित समय-सीमा में स्पष्ट और संतोषजनक जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने यह भी संकेत दिया है कि यदि जवाब असंतोषजनक पाया गया, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध अधिनियम के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को सूचना अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।