
डिंडोरी। डिंडोरी जिले में पेयजल संकट अब सिर्फ एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि सीधी राजनीतिक जिम्मेदारी का सवाल बनता जा रहा है। कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया के हालिया निरीक्षण ने कई खामियों को उजागर किया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों, खासकर Omkar Markam पर खड़ा हो गया है।
⚡ सरकार के दावे बनाम हकीकत
राज्य सरकार द्वारा “हर घर जल” के बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति नियमित नहीं है और कई योजनाएं तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से ठप पड़ी हैं।
⚡ विधायक से सीधे सवाल
👉 जब क्षेत्र में नल-जल योजनाएं ठप हैं, तो विधायक की जवाबदेही कहाँ है?
👉 क्या सिर्फ चुनाव जीतना ही जिम्मेदारी है, या जनता को पानी देना भी?
👉 क्या ओंकार मरकाम ने इन समस्याओं को विधानसभा में मजबूती से उठाया?
🚨 जमीनी हकीकत vs राजनीतिक दावे
ग्राम सिमरधा में लोग आज भी हैंडपंप पर निर्भर हैं—
👉 तो क्या “हर घर जल” का सपना डिंडोरी में फेल हो गया?
ग्राम खामी में पाइपलाइन में खामियां—
👉 क्या यह भ्रष्टाचार है या नेताओं की चुप्पी का नतीजा?
ग्राम अंडई में नल-जल योजना बंद—
👉 क्या विधायक को अपने ही क्षेत्र की योजनाओं की जानकारी नहीं?
🔥 जनता का गुस्सा—अब सवाल सीधे
👉 विधायक जी, पानी कब आएगा—या सिर्फ वादे ही मिलेंगे?
👉 क्या जनता की समस्याएं सिर्फ चुनावी भाषण तक सीमित हैं?
👉 अगर योजनाएं फेल हैं, तो जिम्मेदार कौन—प्रशासन या जनप्रतिनिधि?
⚠️ राजनीतिक घेराबंदी तेज
कलेक्टर के निरीक्षण ने साफ कर दिया है कि
👉 जमीनी स्तर पर व्यवस्था कमजोर है
👉 और जनप्रतिनिधियों की भूमिका सवालों के घेरे में है
अब देखना यह होगा कि Omkar Markam इन सवालों का जवाब देते हैं या फिर यह मुद्दा भी राजनीतिक बयानबाज़ी में दबकर रह जाएगा।
👉 डिंडोरी पूछ रहा है—“पानी नहीं, तो फिर विकास किस बात का?”




