सब-इंस्पेक्टर बनी पत्नी को पति से आई ‘शर्म’, पहनावे और पहचान बनी तलाक की वजह
भोपाल। विशेष संवाददाता – राजकुमार दुबे, नरसिंहपुर मो.नं. 94254 57928
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने रिश्तों, संस्कारों और सामाजिक सोच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर बनी एक महिला ने अपने ही पति से तलाक की मांग कर दी, और वजह न दहेज है, न हिंसा—बल्कि पति का पहनावा, पेशा और सामाजिक पहचान।
मामला अब भोपाल के कुटुंब न्यायालय तक पहुंच चुका है, जहां कई दौर की काउंसलिंग के बावजूद पत्नी अपने फैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं है।
पति के पहनावे से ‘असहज’ पत्नी
परिवर्तित नामों के अनुसार, पत्नी नीलम पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर है, जबकि पति अमन पारंपरिक रूप से पुरोहिताई का कार्य करता है।
पत्नी का कहना है कि पति धोती-कुर्ता पहनता है, शिखा रखता है, और ऐसे व्यक्ति के साथ सार्वजनिक जीवन में दिखना उसके पद के अनुरूप नहीं है।
काउंसलिंग के दौरान पत्नी ने यहां तक कह दिया कि
“पति की हैसियत नहीं है कि वह मुझे अपने साथ रख सके।”
यह बयान सुनकर न केवल पति, बल्कि मौजूद काउंसलर भी स्तब्ध रह गए।
जिसने वर्दी तक पहुंचाया, वही आज बोझ बन गया पति अमन का दर्द शब्दों में छलक उठा। उसने बताया कि शादी के समय पत्नी बेरोजगार थी।
पुरोहिताई से घर चलाया, पत्नी को पढ़ाया-लिखाया, स्नातक कराया और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में हर संभव सहयोग दिया।
अब जब पत्नी सब-इंस्पेक्टर बन चुकी है, तो उसी पति का साथ उसे अपमानजनक लगने लगा है, जिसने उसके सपनों की नींव रखी थी।
पति का कहना है कि पत्नी के शब्दों ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया है, फिर भी वह 6 साल के रिश्ते को बचाने की आखिरी कोशिश कर रहा है।
कुटुंब न्यायालय में संघर्ष जारी
फिलहाल मामला कुटुंब न्यायालय में विचाराधीन है। काउंसलिंग के जरिए रिश्ते को बचाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन पत्नी तलाक के फैसले पर अडिग बनी हुई है।
समाज के लिए एक कठोर सवाल
यह मामला केवल एक दंपति का नहीं, बल्कि पद, अहंकार और संस्कारों के टकराव की कहानी है।
जहां एक ओर वर्दी सम्मान की प्रतीक मानी जाती है, वहीं दूसरी ओर उसी वर्दी के पीछे रिश्तों की उपेक्षा और मूल्यों का क्षरण साफ नजर आता है।
सवाल यह है—क्या सफलता के बाद रिश्ते बोझ बन जाते हैं?
और क्या पहनावा इंसान की इज्जत तय करता है?