बढ़ते डिजिटल लेन-देन के साथ तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध, छोटे शहर और गांव भी निशाने पर
भोपाल। मध्यप्रदेश में साइबर अपराध तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। प्रदेश में अब हालात ऐसे हो गए हैं कि औसतन हर दिन लगभग 190 लोग साइबर फ्रॉड का शिकार हो रहे हैं। डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर ठग भी लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि बढ़ते साइबर अपराधों के बावजूद प्रदेश में इन मामलों की जांच करने के लिए 500 से भी कम प्रशिक्षित अधिकारी उपलब्ध हैं। ऐसे में हजारों शिकायतों की जांच समय पर करना पुलिस और साइबर विशेषज्ञों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
2021 के मुकाबले कई गुना बढ़े साइबर अपराध
पिछले कुछ वर्षों में साइबर अपराध के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार—
2021: 13,768 मामले
2022: 26,053 मामले
2023: 52,846 मामले
2024: 68,578 मामले
वहीं 2025 के पहले छह महीनों में ही 34,021 साइबर अपराध के मामले दर्ज हो चुके हैं, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष के अंत तक यह आंकड़ा और भी अधिक हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट और डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग के कारण साइबर अपराधियों को नए अवसर मिल रहे हैं।
इन तरीकों से लोगों को ठग रहे साइबर अपराधी
साइबर ठग लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। प्रमुख साइबर फ्रॉड के प्रकारों में शामिल हैं—
फिशिंग और ओटीपी फ्रॉड
फर्जी बैंक कॉल और केवाईसी अपडेट के नाम पर ठगी
ऑनलाइन निवेश और शेयर मार्केट फ्रॉड
सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग
डिजिटल अरेस्ट और वीडियो कॉल ब्लैकमेल
फर्जी जॉब ऑफर और लॉटरी ठगी
अक्सर अपराधी लोगों को फोन कॉल, मैसेज या सोशल मीडिया के जरिए झांसे में लेकर बैंक डिटेल और ओटीपी हासिल कर लेते हैं और कुछ ही मिनटों में उनके खाते से पैसे निकाल लेते हैं।
छोटे शहर और ग्रामीण क्षेत्र भी बन रहे निशाना
पहले साइबर अपराध केवल बड़े शहरों तक सीमित थे, लेकिन अब अपराधियों का नेटवर्क छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों तक फैल चुका है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के कारण गांवों और छोटे शहरों के लोग भी साइबर ठगी के शिकार हो रहे हैं।
जांच में सबसे बड़ी चुनौती: स्टाफ और तकनीकी संसाधनों की कमी
प्रदेश में साइबर अपराधों की जांच के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित अधिकारी और तकनीकी संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
साइबर अपराधों की जांच के लिए डिजिटल फॉरेंसिक, डेटा ट्रैकिंग, सर्वर विश्लेषण और तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत होती है। लेकिन सीमित संसाधनों के कारण कई मामलों में जांच लंबी खिंच जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराध से निपटने के लिए पुलिस को आधुनिक तकनीक और अधिक प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत है।
पुलिस की सलाह: सतर्क रहें, तुरंत शिकायत करें
पुलिस ने नागरिकों से साइबर अपराध से बचने के लिए सतर्क रहने की अपील की है। लोगों को सलाह दी गई है कि—
किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें
बैंक, ओटीपी और पासवर्ड की जानकारी किसी से साझा न करें
संदिग्ध कॉल या मैसेज से सावधान रहें
सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दूरी बनाए रखें
निवेश से जुड़े लालच भरे ऑफर से बचें
यदि किसी के साथ साइबर ठगी होती है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
साइबर अपराध रोकने के लिए जागरूकता जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराध से निपटने के लिए जन जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। यदि लोग सतर्क रहें और समय पर शिकायत करें तो कई मामलों में ठगी की रकम वापस मिलने की संभावना भी रहती है।