सरकारी दफ्तर में दो-दो नियुक्ति पत्र, किसके संरक्षण में चल रहा था फर्जीवाड़ा ?
डिंडोरी। जनपद पंचायत डिंडोरी से सामने आया एक मामला अब प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जांच के दौरान कंप्यूटर ऑपरेटर पुरुषोत्तम चंदेल की नियुक्ति से जुड़े दो अलग-अलग नियुक्ति पत्र सामने आने से पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। सूत्रों के अनुसार जांच टीम को ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनमें नियुक्ति आदेश, तिथि और प्रक्रिया में भारी विरोधाभास दिखाई दे रहा है। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि जनपद कार्यालय में फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार किए जाने का खेल लंबे समय से चल रहा था।
एक व्यक्ति के लिए दो नियुक्ति पत्र, बड़ा सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक ही व्यक्ति के लिए दो अलग-अलग नियुक्ति पत्र कैसे जारी हुए। क्या यह महज प्रशासनिक गलती है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा फर्जीवाड़ा छिपा है? जांच में सामने आए दस्तावेजों ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में
विभागीय सूत्रों का कहना है कि संबंधित कर्मचारी को जनपद कार्यालय के कुछ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त था। यही वजह है कि लंबे समय तक यह मामला दबा रहा और कथित तौर पर सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर किया जाता रहा। यदि जांच में यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला केवल एक कर्मचारी की नियुक्ति तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि जनपद कार्यालय के कई जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।
सरकार की निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले ने सरकार की निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर सरकारी दफ्तर में इस तरह के दस्तावेज कैसे तैयार हो गए और जिम्मेदार अधिकारी अब तक जवाबदेही से बाहर क्यों हैं?
जांच के बाद हो सकता है बड़ा खुलासा
फिलहाल जांच टीम पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही है। माना जा रहा है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे जनपद कार्यालय के कई जिम्मेदार चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। यदि फर्जी नियुक्ति पत्र की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।