“जहाँ कभी मटकों से ढोया जाता था पानी, आज वहाँ पाइपलाइन से बह रही है उम्मीद — महिला सरपंच ने बदल दी गाँव की तस्वीर।”
डिंडौरी। मेहदवानी जनपद ग्राम पंचायत सारंगपुर के पोषक ग्राम कनेरी रैयत में वर्षों से चली आ रही पेयजल समस्या अब इतिहास बन गई है। करीब 500 की आबादी वाले इस गाँव में लोगों को पहले डेढ़ किलोमीटर दूर पहाड़ी उतरकर नर्मदा नदी से पानी लाना पड़ता था — महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह रोज की कठिन परीक्षा थी।
लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं… और यह बदलाव संभव हुआ महिला सरपंच श्रीमती कमलवती परस्ते की दृढ़ पहल से।
🚰 सरपंच की पहल से गाँव तक पहुँचा नर्मदा का जल
सरपंच ने विभागीय मार्गदर्शन, ग्रामीणों और स्व-सहायता समूह की महिलाओं के सहयोग से एक ठोस योजना बनाई।
गाँव से नर्मदा नदी तक पाइपलाइन बिछाई गई
नदी किनारे मोटर पम्प स्थापित किया गया
गाँव में सीमेंट टंकियाँ बनाकर तीन बसाहटों तक पानी की व्यवस्था की गई
अब लोगों के साथ-साथ पशुओं को भी पर्याप्त पानी उपलब्ध हो रहा है
जिस रास्ते पर पहले मटके ढोए जाते थे, अब वहाँ से पाइपलाइन पानी पहुँचा रही है।
💰 जनसहयोग + सरकारी राशि = सफल मॉडल
इस योजना में सरकारी संसाधन और जनभागीदारी का शानदार संगम देखने को मिला।
15वें वित्त आयोग से राशि: ₹4.50 लाख
ग्रामीणों का सहयोग व समूह ऋण: अतिरिक्त योगदान
कुल लागत: लगभग ₹6 लाख
ट्रांसफार्मर, पाइपलाइन, मोटर एवं अन्य व्यवस्थाएँ स्थापित
यह काम केवल योजना नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प का परिणाम बना।
👩🌾 महिला नेतृत्व का सशक्त उदाहरण
इस पहल ने दिखाया कि जब नेतृत्व संवेदनशील हो और समाज साथ खड़ा हो, तो गाँव की बड़ी समस्याएँ भी छोटे समय में हल हो सकती हैं।
यह मॉडल अब ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और जनभागीदारी का प्रेरणादायी उदाहरण बन गया है।
🏆 कलेक्टर ने की सराहना, सम्मान की घोषणा
कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने इस अभिनव कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा—
“जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और सामुदायिक सहभागिता से ग्राम स्तर की समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव है।”
उन्होंने महिला सरपंच को इस उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित करने की घोषणा भी की है।
🌿 अब गाँव की पहचान: संघर्ष नहीं, समाधान
जहाँ कभी पानी के लिए संघर्ष था, आज वहाँ नर्मदा का जल घर-घर पहुँच रहा है।
कनेरी रैयत अब सिर्फ एक गाँव नहीं, बल्कि स्वावलंबन और महिला नेतृत्व की जीवंत कहानी बन गया है।