डिंडौरी। जिले की ग्राम पंचायत विक्रमपुर में सरकारी राशि के उपयोग में बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। जांच में सामने आया है कि पंचायत में लाखों रुपये शासन के नियमों के विपरीत खर्च किए गए। मामले को गंभीर मानते हुए जिला पंचायत डिंडौरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिव्यांशु चौधरी ने कड़ा कदम उठाते हुए 13,66,518 रुपये की वसूली का आदेश जारी किया है।
जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत विक्रमपुर में वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान 15वें और 5वें वित्त आयोग की राशि खर्च करने में भारी अनियमितताएं की गईं। शिकायत सामने आने के बाद जनपद स्तर पर जांच कराई गई, जिसमें कई नियमों के उल्लंघन का खुलासा हुआ।
जांच में पाया गया कि पंचायत में आकस्मिक और अन्य मदों में निर्धारित सीमा से अधिक खर्च किया गया। वर्षवार अनियमित व्यय इस प्रकार सामने आया—
2022-23 : 1,85,262 रुपये
2023-24 : 5,61,774 रुपये
2024-25 : 6,19,482 रुपये
इस तरह कुल 13,66,518 रुपये शासन के नियमों के विरुद्ध खर्च होना पाया गया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर यह राशि सरपंच रामनारायण धुर्वे और तत्कालीन सचिव तीरथ प्रसाद गोसाई से बराबर-बराबर 6,83,259 रुपये वसूलने के निर्देश दिए गए हैं।
सुनवाई के दौरान दोनों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया, लेकिन वे अपने बचाव में कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सके। जांच में यह भी सामने आया कि नल-जल योजना के अंतर्गत बिना प्रशासकीय और तकनीकी स्वीकृति के कार्य कराए गए और नियमों के विपरीत राशि निकाली गई।
मामले को शासन की राशि का दुरुपयोग मानते हुए मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 89 के तहत दोनों की जिम्मेदारी तय की गई है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि 7 दिन के भीतर राशि जमा नहीं करने पर धारा 92 और भू-राजस्व संहिता के तहत कड़ी वसूली कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला सामने आने के बाद पंचायत व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की निगरानी पर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।