गलियों से लेकर नर्मदा तट तक शराब, फिर भी कार्रवाई शून्य — सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
“जब कानून सोता है, तब शराब माफिया जागता है — युवाओं का सीधा सवाल”
आंखों पर पट्टी बांधकर युवाओं का विरोध, प्रशासन की चुप्पी पर सीधा सवाल
डिंडौरी। डिंडौरी में अवैध शराब की बिक्री अब छिपा हुआ अपराध नहीं रही, बल्कि खुलेआम चलने वाला ऐसा कारोबार बन चुकी है, जो बिना किसी संरक्षण के संभव ही नहीं माना जा सकता।अवैध शराब का कारोबार अब किसी छुपे हुए कोने में नहीं, बल्कि खुलेआम गलियों, मोहल्लों और नर्मदा के पवित्र तट तक फैल चुका है। हालात ऐसे हैं कि अब सवाल शराब माफिया का नहीं, बल्कि उस संरक्षण का है, जिसके बिना इतना बड़ा और निर्भीक नेटवर्क चल ही नहीं सकता।
गुरुवार को युवाओं ने आंखों पर काली पट्टी बांधकर जो विरोध दर्ज कराया, वह सिर्फ प्रतीक नहीं था — यह प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा अविश्वास था। नायब तहसीलदार को सौंपे ज्ञापन के जरिए युवाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि जनता अब “जानकारी नहीं है” जैसे बहानों को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब अवैध शराब हर किसी को दिख रही है, तो जिम्मेदार विभागों को क्यों नहीं दिख रही? क्या यह संरक्षण निचले स्तर तक सीमित है, या फिर ऊपर तक इसकी परतें फैली हुई हैं? कार्रवाई न होना अब सामान्य लापरवाही नहीं, बल्कि संदेह को जन्म देने वाली स्थिति बन चुका है।प्रशासन की निष्क्रियता पर सीधा सवाल खड़ा किया। युवाओं का कहना है कि अवैध शराब हर गली-मोहल्ले में उपलब्ध है, फिर भी कार्रवाई न होना यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं सिस्टम की मौन सहमति इस धंधे को ताकत दे रही है।
संगठन अध्यक्ष विवेक ओबेरॉय ने बताया कि एक सप्ताह पूर्व भी ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन न तो कार्रवाई हुई और न ही कोई जवाब मिला। यह चुप्पी अब जनता को प्रशासन के खिलाफ खड़ा कर रही है। सवाल उठ रहा है कि जब सब कुछ सबकी नजरों के सामने हो रहा है, तो जिम्मेदार विभाग किस दबाव या किन कारणों से मौन हैं?
ज्ञापन में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के उस स्पष्ट आदेश का भी उल्लेख किया गया, जिसमें नर्मदा नदी के दोनों किनारों पर 5 किलोमीटर तक शराब बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था। इसके बावजूद नर्मदा तट पर शराब पीने और बेचने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि शासन की साख को खुली चुनौती है।
युवाओं का कहना है कि अवैध शराब अब सामाजिक समस्या नहीं रही, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच टकराव का मुद्दा बन चुकी है। नशे की खुली उपलब्धता से युवा पीढ़ी बर्बादी की ओर धकेली जा रही है, जबकि जिम्मेदार महकमे मौन साधे हुए हैं।
नर्मदा के पवित्र तट पर शराब पीने वालों द्वारा श्रद्धालुओं से अभद्रता की घटनाओं ने आक्रोश को और भड़का दिया है। इससे धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं और जिले की छवि पर सवाल उठ रहे हैं।
युवा संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि अवैध शराब के खिलाफ तत्काल, ठोस और दिखाई देने वाली कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन केवल ज्ञापन तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में प्रशासन और जनता के बीच यह टकराव और तेज हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी व्यवस्था की होगी।