
जबलपुर में रिटायर अफसर की विदाई बनी जनआक्रोश का विस्फोट, छात्रों ने खोली सिस्टम की सड़ी हुई परतें
जबलपुर। सरकारी विदाई समारोहों में अक्सर अफसरों की झूठी वाहवाही, चापलूसी और महंगे गुलदस्तों की चमक दिखाई देती है। लेकिन जबलपुर में इस बार तस्वीर बिल्कुल अलग थी। यहां एक छात्र ने भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे रिटायर अधिकारी को गुलाब नहीं, बल्कि “बेशर्म के फूल” भेंट कर पूरे सिस्टम को आईना दिखा दिया।
जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त सी.के. दुबे के विदाई समारोह में उस समय सन्नाटा छा गया, जब एक छात्र मंच तक पहुंचा और सबके सामने अधिकारी को ‘बेशर्म के फूल’ थमा दिए। छात्र की आवाज में गुस्सा था, आंखों में आक्रोश और शब्दों में व्यवस्था के खिलाफ खुली बगावत।
छात्र ने भरी सभा में कहा —
“भगवान से प्रार्थना है कि ऐसा अधिकारी दोबारा इस विभाग में न आए। आदिवासी बच्चों का हक खाया गया, छात्रावासों को बर्बाद किया गया और भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया गया।”
आदिवासी बच्चों के हिस्से का निवाला निगलने के आरोप
छात्रों का आरोप है कि आदिवासी छात्रावासों में वर्षों से बदहाली का साम्राज्य कायम रहा। बच्चों को न ढंग का भोजन मिला, न साफ पानी, न मूलभूत सुविधाएं। छात्रावासों की हालत ऐसी रही मानो वहां इंसान नहीं, मजबूरियां कैद हों।
आरोप यह भी हैं कि बच्चों के नाम पर आने वाला बजट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता रहा और जिम्मेदार अधिकारी कुर्सी की मलाई खाते रहे।
विदाई नहीं, जनता का फैसला था
जिस समारोह में तालियां बजनी थीं, वहां सवाल गूंज उठे। जिस मंच पर सम्मान होना था, वहां व्यवस्था के खिलाफ गुस्से का विस्फोट दिखाई दिया।
यह घटना सिर्फ एक अधिकारी के विरोध तक सीमित नहीं रही, बल्कि उस पूरे सरकारी ढांचे पर करारा तमाचा बन गई, जहां गरीब और आदिवासी बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जाता है।
युवाओं ने दे दिया सीधा संदेश
जबलपुर की इस घटना ने साफ कर दिया है कि अब युवा चुप बैठने वाले नहीं हैं।
अब सवाल पूछे जाएंगे…
अब भ्रष्टाचार पर पर्दा नहीं डाला जाएगा…
अब “विदाई समारोह” में सिर्फ फूल नहीं, हिसाब भी दिया जाएगा।
सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे “व्यवस्था के खिलाफ युवाओं का विद्रोह” बता रहे हैं।
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