
लखनपुर प्राथमिक शाला का मामला, ग्रामीणों ने शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होने का लगाया आरोप, प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा.

डिंडोरी/अमरपुर। जिले के विकासखंड अमरपुर अंतर्गत जनशिक्षा केंद्र निगौरी के प्राथमिक शाला लखनपुर में पदस्थ शिक्षिका श्रीमती कर्मवती मरावी को लेकर ग्रामीणों में असंतोष सामने आया है। ग्रामवासियों एवं जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त शिकायत पत्र जिला कलेक्टर को सौंपकर शिक्षिका के तत्काल स्थानांतरण की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित शिक्षिका वर्ष 1998 से लगातार प्राथमिक शाला लखनपुर में पदस्थ हैं और लगभग 26 वर्षों से एक ही विद्यालय में कार्यरत हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इतने लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने के कारण विद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
शिकायत पत्र में उल्लेख किया गया है कि शिक्षिका द्वारा नियमित रूप से समय पर विद्यालय नहीं पहुंचने, बच्चों के अध्ययन-अध्यापन पर पर्याप्त ध्यान नहीं देने तथा ग्रामीणों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ विवादपूर्ण व्यवहार किए जाने जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इन परिस्थितियों का सीधा प्रभाव विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि विद्यालय में नामांकित बच्चों की संख्या लगभग 60 है, लेकिन बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में अपेक्षित प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि विद्यालय में शिक्षकों की व्यवस्था और शिक्षण कार्य को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, जिसके कारण अभिभावकों में भी नाराजगी व्याप्त है।
ग्रामवासियों का आरोप है कि विद्यालय की स्थिति में सुधार लाने के लिए कई बार मौखिक रूप से भी संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से हस्ताक्षर कर प्रशासन को लिखित शिकायत प्रस्तुत की है।
शिकायत पत्र में यह मांग भी की गई है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो विभागीय नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करते हुए शिक्षिका का स्थानांतरण किया जाए, ताकि विद्यालय में शैक्षणिक वातावरण बेहतर हो सके और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना नहीं, बल्कि विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना है। उनका मानना है कि लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान प्रशासनिक हस्तक्षेप से ही संभव है।
अब इस पूरे मामले में जिला प्रशासन, विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) एवं शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिकायत की जांच कब और किस स्तर पर होती है तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर क्या कार्रवाई की जाती है।
हालांकि, शिकायत पत्र में लगाए गए आरोप ग्रामीणों के हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
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