
अमरपुर। भाजपा संगठन और सत्ता का मजबूत गढ़ माने जाने वाले अमरपुर में आज हालात ऐसे बन चुके हैं कि आम जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है। कस्बे का मुख्य बस स्टैंड बदहाली की मिसाल बन चुका है। पीने के पानी की व्यवस्था नहीं, सार्वजनिक शौचालय बेकार, पार्किंग का नामोनिशान नहीं और सड़क पर बेतरतीब खड़ी गाड़ियां हर दिन हादसों को न्योता दे रही हैं।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि भाजपा मंडल अध्यक्ष नामदेव जी का गृह निवास भी अमरपुर में ही है, वहीं क्षेत्रीय विधायक ओमप्रकाश धुर्वे जी भी इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन जनता का आरोप है कि अपनी ही सरकार में स्थानीय समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। इतना ही नहीं, जनपद पंचायत अध्यक्ष हन्नु सिंह पट्टा भी पूरे मामले में मूकदर्शक बने बैठे हैं, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ती जा रही है।
🚨 सड़क पर खड़ी गाड़ियां बनीं मौत का खतरा
स्थानीय लोगों के अनुसार मार्केट और हाट के दिनों में अमरपुर का मुख्य बाजार पूरी तरह जाम हो जाता है। दो पहिया और चार पहिया वाहन सड़क पर ही खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे घंटों ट्रैफिक लगा रहता है। कई बार एंबुलेंस तक जाम में फंस चुकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन और पंचायत सिर्फ तमाशा देख रहे हैं।
“यहां सड़क नहीं, हादसों का इंतजार होता है।”
“अगर कोई बड़ा हादसा हुआ तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?”
🚽 सामुदायिक शौचालय बना सवालों का केंद्र
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सामुदायिक शौचालय का निर्माण तो किया गया, लेकिन ऐसी जगह बना दिया गया जहां कोई आता-जाता ही नहीं। अब लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद शौचालय सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्थान चयन ग्राम पंचायत द्वारा किया जाता है, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसी जगह का चयन क्यों किया गया जहां जनता को कोई लाभ ही नहीं मिल रहा?
लोगों में चर्चा है कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से ज्यादा भुगतान और कमीशन पर ध्यान दिया गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जनता खुलकर सवाल पूछ रही है।
“क्या विकास सिर्फ कागजों और बिलों में हुआ?”
“अगर सही जगह निर्माण होता तो महिलाएं और यात्री आज परेशान क्यों होते?”
⚠️ जनता की आवाज उठी तो दबाव की राजनीति?
कस्बे के युवाओं और ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी कोई बस स्टैंड, सड़क, ट्रैफिक या पंचायत व्यवस्था को लेकर सवाल उठाता है, तब उसे दबाने की कोशिश की जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ लोग सिर्फ सत्ता की “जी हुजूरी” में लगे रहते हैं, जबकि असली समस्याओं पर बोलने वाले युवाओं को डराने और चुप कराने का माहौल बनाया जाता है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन लगातार बढ़ते जनआक्रोश ने पंचायत और स्थानीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
🔥 जनता पूछ रही — आखिर अमरपुर को कब मिलेगा असली विकास?
- बस स्टैंड बदहाल क्यों?
- पीने के पानी की व्यवस्था कहां है?
- सड़क पर खड़ी गाड़ियों का समाधान क्यों नहीं?
- शौचालय बेकार जगह पर किसके इशारे में बना?
- हादसों के बाद भी प्रशासन मौन क्यों?
- जनप्रतिनिधि जनता के सवालों से दूरी क्यों बना रहे हैं?
अब अमरपुर में लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है। स्थानीय युवाओं और नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थायी पार्किंग, यातायात नियंत्रण, पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाओं की व्यवस्था नहीं हुई तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन, धरना प्रदर्शन और चक्का जाम किया जाएगा।
🚨 अमरपुर की जनता का साफ संदेश:
“जनता अब सिर्फ भाषण नहीं, जमीन पर विकास देखना चाहती है!”
🔥 Socialnetworkingservices.in
⚡ हर खबर में दम, हर मुद्दे में आग !


