भोपाल। मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी शासकीय महाविद्यालयों को निर्देश जारी करते हुए लंबित बिजली बिलों के भुगतान को लेकर सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण में कॉलेजों को आवंटित ग्लोबल बजट की शेष राशि का उपयोग प्राथमिकता से बिजली बिलों के भुगतान में किया जाए।
जानकारी के अनुसार, कई शासकीय कॉलेजों पर बिजली बिलों की बड़ी राशि बकाया है, जिसके चलते विभाग को यह कदम उठाना पड़ा। उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक (वित्त) ने सभी प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि वे तत्काल लंबित भुगतान सुनिश्चित करें।
⚡ प्राचार्य होंगे जिम्मेदार
विभाग ने साफ कर दिया है कि यदि समय पर बिजली बिलों का भुगतान नहीं किया गया, तो संबंधित महाविद्यालय के प्राचार्य को इसके लिए जिम्मेदार माना जाएगा। यह निर्देश विशेष रूप से उन संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां लंबे समय से बकाया राशि जमा नहीं की गई है।
📊 वित्तीय वर्ष का अंतिम दौर
वर्तमान में वित्तीय वर्ष का अंतिम चरण चल रहा है, ऐसे में विभाग बजट के समुचित उपयोग पर जोर दे रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते भुगतान नहीं किया गया, तो आगे वित्तीय अनियमितताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
🏫 सभी कॉलेजों को निर्देश जारी
प्रदेश के सभी शासकीय कॉलेजों को इस संबंध में लिखित निर्देश भेज दिए गए हैं। विभाग ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि भविष्य में बिजली बिलों का नियमित भुगतान होता रहे, ताकि इस प्रकार की स्थिति दोबारा न बने।
🔎 निष्कर्ष
उच्च शिक्षा विभाग का यह कदम प्रशासनिक अनुशासन और वित्तीय पारदर्शिता की दिशा में अहम माना जा रहा है। इससे न केवल लंबित देनदारियों का निपटान होगा, बल्कि संस्थानों की कार्यप्रणाली में भी सुधार आने की उम्मीद है।