
डिंडौरी:-कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिले में 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के द्वितीय चरण को प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में विकासखंड अमरपुर के वनवासी टोला में सामुदायिक स्तर पर विशेष जागरूकता एवं शपथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण महिलाओं एवं समुदाय को बाल विवाह के दुष्परिणाम, बाल विवाह निषेध अधिनियम, इससे संबंधित कानूनी प्रावधानों तथा रोकथाम के उपायों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। साथ ही विवाह आयोजनों से जुड़े विभिन्न सेवा प्रदाताओं जैसे डीजे, बैंड पार्टी, टेंट हाउस, कैटरर, हलवाई, फोटोग्राफर आदि का संवेदीकरण करते हुए उन्हें शपथ दिलाई गई कि वे किसी भी बाल विवाह आयोजन में अपनी सेवाएँ प्रदान नहीं करेंगे।
सेवा प्रदाताओं ने यह भी संकल्प लिया कि बाल विवाह की आशंका होने पर वे तत्काल पुलिस, सीएमपीओ अथवा प्रशासन को सूचना देंगे, अपने प्रतिष्ठान एवं कार्यक्षेत्र में यह सूचना अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करेंगे कि“यह क्षेत्र बाल विवाह निषिद्ध क्षेत्र है” तथा “बाल विवाह में शामिल न होने” संबंधी शपथ संदेश सार्वजनिक रूप से अंकित करेंगे।
कार्यक्रम में सेक्टर पर्यवेक्षक श्रीमती धनमोतिन, वन स्टॉप सेंटर प्रशासक श्रीमती सविता धार्वे, स्वास्थ्य विभाग की एएनएम, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएँ सक्रिय रूप से उपस्थित रहीं।वन स्टॉप सेंटर प्रशासक द्वारा महिलाओं को 181, 1098, 1090 सहित विभागीय सहायता सेवाओं एवं योजनाओं की जानकारी दी गई। वहीं स्वास्थ्य विभाग की एएनएम एवं आशा कार्यकर्ताओं द्वारा बाल स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से संबंधित परामर्श भी प्रदान किया गया। जिला प्रशासन द्वारा स्पष्ट संदेश दिया गया कि बाल विवाह कराना अथवा उसमें संलिप्त होना दंडनीय अपराध है, और समाज, परिवार तथा सेवा प्रदाताओं की सामूहिक जागरूकता एवं सहभागिता से ही बाल विवाह की कुप्रथा को पूर्णतः समाप्त किया जा सकता है।