भोपाल। मध्यप्रदेश में जल संरक्षण और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने “जल गंगा संवर्धन अभियान” का शुभारंभ करते हुए घोषणा की कि आगामी 100 दिनों में प्रदेश के जलस्रोतों को साफ और संरक्षित किया जाएगा। यह अभियान राज्य के सभी जिलों में व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य है कि इस अभियान के माध्यम से नदियों, तालाबों, कुओं और अन्य जलस्रोतों की सफाई, पुनर्जीवन और संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। अभियान के तहत स्थानीय प्रशासन, पंचायतों और विभिन्न विभागों की सक्रिय भागीदारी रहेगी।
🔷 सभी जिलों में चलेगा विशेष अभियान
इस अभियान को प्रदेश के सभी जिलों में लागू किया जाएगा, जहां जिला प्रशासन की निगरानी में साफ-सफाई और जल संरक्षण से जुड़े कार्य किए जाएंगे। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि जल संकट से निपटा जा सके।
🔷 18 विभाग मिलकर करेंगे काम
जल संरक्षण के इस महाअभियान में लगभग 18 विभागों को जोड़ा गया है, जिनमें नगरीय प्रशासन, ग्रामीण विकास, जल संसाधन, पर्यावरण और वन विभाग प्रमुख रूप से शामिल हैं। सभी विभाग मिलकर एक समन्वित योजना के तहत कार्य करेंगे।
🔷 2500 करोड़ रुपये से होंगे विकास कार्य
अभियान के अंतर्गत लगभग 2500 करोड़ रुपये की लागत से जल संरचनाओं का निर्माण, मरम्मत और पुनर्जीवन किया जाएगा। इसमें तालाबों का गहरीकरण, कुओं की सफाई, जल निकासी व्यवस्था सुधारना और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना शामिल है।
🔷 जनभागीदारी पर विशेष जोर
सरकार ने इस अभियान को जन आंदोलन बनाने पर जोर दिया है। आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि जल संरक्षण को एक स्थायी संस्कृति बनाया जा सके।
🔷 जल गुणवत्ता और पेयजल व्यवस्था पर फोकस
अभियान के दौरान पेयजल की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ स्वच्छ जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए नियमित मॉनिटरिंग और परीक्षण की व्यवस्था की जाएगी।
📌 निष्कर्ष
“जल गंगा संवर्धन अभियान” मध्यप्रदेश में जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि यह अभियान सफल होता है, तो आने वाले समय में जल संकट से राहत मिलने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।