भोपाल। मध्यप्रदेश शासन ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक दक्ष और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य के शासकीय विभागों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत प्रशिक्षण लेना अब अनिवार्य कर दिया गया है। इस प्रशिक्षण से संबंधित जानकारी को अधिकारियों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (APAR) तथा गोपनीय चरित्रावली में शामिल किया जाएगा।
राज्य सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को iGOT (Integrated Government Online Training) पोर्टल पर पंजीयन कर विभिन्न प्रशिक्षण मॉड्यूल पूर्ण करने होंगे। यह पहल कर्मचारियों की कार्यक्षमता, कौशल विकास एवं प्रशासनिक क्षमता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
मिशन कर्मयोगी के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आधुनिक प्रशासनिक तकनीकों, डिजिटल कार्यप्रणाली, सेवा वितरण में सुधार तथा जनहितकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया जाएगा। अधिकारियों द्वारा प्राप्त प्रशिक्षण और उनकी प्रगति का विवरण अब उनके वार्षिक मूल्यांकन का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से शासकीय कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी। साथ ही, नागरिकों को बेहतर और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।
मध्यप्रदेश सरकार का यह कदम प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है, जो भविष्य में शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और परिणाममुखी बनाने में सहायक सिद्ध होगा।