
सरपंच की कुंभकर्णी नींद नहीं टूट रही, जनपद CEO साहब के उड़नदस्ते को भी नहीं दिख रही बदहाली! आखिर अमरपुर की जनता किसके भरोसे?
अमरपुर /डिंडौरी। अमरपुर में विकास के दावों की चमक के पीछे जमीनी हकीकत कितनी बदहाल है, इसका एक नमूना मछली मार्केट की तस्वीर में साफ दिखाई दे रहा है। जर्जर शेड, उखड़ी हुई टीन की चादरें और रखरखाव की बदहाल स्थिति देखकर एक ही सवाल उठता है—क्या अमरपुर की सार्वजनिक व्यवस्थाओं को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है?
जिस बाजार का उपयोग आम नागरिक और छोटे व्यापारी करते हैं, उसकी यह हालत आखिर किसकी जिम्मेदारी है? क्या जनता को केवल सरकारी योजनाओं के भाषण सुनने के लिए छोड़ दिया गया है?
🔥 सरपंच साहब! कुंभकर्णी नींद से जागने का समय कब आएगा?
ग्राम पंचायत के सरपंच की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पंचायत क्षेत्र में सार्वजनिक सुविधाओं की ऐसी स्थिति है, लेकिन इस समस्या को लेकर सरपंच की ओर से अब तक क्या पहल हुई, यह जनता जानना चाहती है।
स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में सरपंच और भाजपा मंडल अध्यक्ष की नजदीकियों को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। लेकिन जनता का सवाल है कि राजनीतिक नजदीकियां निभाने का समय तो मिल जाता है, क्या जनता की समस्याओं के लिए भी समय निकलेगा?
सरपंच साहब, जनता ने आपको जिम्मेदारी दी है, आराम करने का अधिकार-पत्र नहीं!
क्या मछली मार्केट की बदहाली पर पंचायत ने कोई प्रस्ताव बनाया? क्या जनपद कार्यालय को लिखित शिकायत भेजी? क्या मरम्मत के लिए बजट मांगा? यदि हां, तो कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक किया जाए।
🔥 CEO साहब का उड़नदस्ता, लेकिन जनता की समस्या जमीन पर!
जनपद पंचायत अमरपुर के CEO साहब से भी जनता सीधे जवाब चाहती है।
क्षेत्र में उड़नदस्ते के साथ निरीक्षण करने वाले अधिकारियों की नजर आखिर इस बदहाल मछली मार्केट तक क्यों नहीं पहुंचती? क्या निरीक्षण का मतलब केवल निर्धारित स्थानों पर पहुंचकर औपचारिकता पूरी करना है?
CEO साहब से सवाल है:
- क्या आपने कभी मछली मार्केट का वास्तविक निरीक्षण किया?
- क्या आपको इस जर्जर शेड की जानकारी है?
- यदि जानकारी है तो मरम्मत के आदेश क्यों नहीं हुए?
- यदि जानकारी नहीं है तो निरीक्षण व्यवस्था किस काम की है?
साहब! उड़नदस्ता लेकर क्षेत्र में पहुंचना बड़ी बात नहीं, जनता की समस्याओं तक पहुंचना असली प्रशासनिक जिम्मेदारी है।
🔥 सरकारी पैसा किस काम आ रहा है? हिसाब सार्वजनिक कीजिए!
मछली मार्केट की स्थिति को देखते हुए इसके निर्माण, मरम्मत और रखरखाव पर खर्च हुई सरकारी राशि की जानकारी सार्वजनिक होना जरूरी है।
किस योजना से निर्माण हुआ? कितनी राशि स्वीकृत हुई? किस एजेंसी ने काम किया? मरम्मत पर कितना खर्च हुआ? क्या गुणवत्ता की जांच हुई?
यदि काम हुआ है तो उसकी वर्तमान हालत ऐसी क्यों है? और यदि मरम्मत के लिए बजट नहीं है तो संबंधित विभाग जनता को स्पष्ट जवाब दे।
जनता के पैसे से बनी संपत्ति की जिम्मेदारी भी जनता के प्रति ही तय होनी चाहिए।
⚠️ क्या प्रशासन किसी हादसे का इंतजार कर रहा है?
शेड की दिखाई दे रही क्षतिग्रस्त स्थिति सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा करती है। बाजार में आने वाले लोगों और व्यापारियों की सुरक्षा के लिए तत्काल तकनीकी निरीक्षण और आवश्यक मरम्मत होनी चाहिए।
प्रशासन को किसी दुर्घटना के बाद जागने की नौबत नहीं आने देनी चाहिए।
📢 अब जनता के सामने जवाब दीजिए!
सरपंच साहब से सवाल: आपकी पंचायत में सार्वजनिक बाजार की यह स्थिति क्यों है?
भाजपा मंडल अध्यक्ष से सवाल: क्या आप अपने राजनीतिक प्रभाव और जनसंपर्क के माध्यम से इस सार्वजनिक समस्या को प्रशासन तक पहुंचाने की पहल करेंगे?
जनपद CEO साहब से सवाल: निरीक्षण के बावजूद इस समस्या का समाधान कब होगा?
संबंधित विभाग से सवाल: निर्माण और मरम्मत का पूरा हिसाब कब सार्वजनिक किया जाएगा?
🔴 कुर्सी जिम्मेदारी देती है, छूट नहीं!
अमरपुर की जनता को अब कागजों में विकास नहीं, जमीन पर बदलाव चाहिए। सरपंच हों या जनपद के अधिकारी, सभी को यह समझना होगा कि सरकारी पद जनता की सेवा के लिए हैं, न कि केवल पद की शोभा बढ़ाने के लिए।
राजनीतिक रिश्ते अपनी जगह हैं, प्रशासनिक जिम्मेदारी अपनी जगह। जनता की समस्याओं पर चुप्पी किसी भी जनप्रतिनिधि या अधिकारी के लिए जवाबदेही का विकल्प नहीं हो सकती।
अब सवाल यह नहीं कि मछली मार्केट कब बनेगा या सुधरेगा, सवाल यह है कि इसकी बदहाली के लिए जिम्मेदार कौन है और जवाब देने से बच कौन रहा है?
अमरपुर की जनता जवाब चाहती है। क्या सरपंच साहब नींद से जागेंगे? क्या CEO साहब मौके पर पहुंचेंगे? क्या संबंधित विभाग कार्रवाई करेगा?
या फिर अमरपुर में विकास केवल कागजों पर दौड़ेगा और जनता बदहाल व्यवस्थाओं के बीच ही जिंदगी गुजारती रहेगी?
यह खबर जनहित में उपलब्ध तस्वीर और सार्वजनिक सुविधाओं की स्थिति पर उठाए गए सवालों पर आधारित है। संबंधित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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“जहाँ खबर नहीं, असर दिखता है!”







