
सरकार के शिक्षा संबंधी दावों की खुली परीक्षा! 102 स्कूल शिक्षकविहीन होने का याचिका में दावा, 499 स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने का आरोप और अब चौर माल में शिक्षक अनुपस्थित। आखिर गरीब बच्चों के भविष्य का हिसाब कौन देगा?
डिंडौरी। मध्यप्रदेश में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। एक तरफ सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बच्चों का भविष्य संवारने के दावे करती है, दूसरी तरफ शिक्षक पदों की रिक्तियां, एकल-शिक्षक स्कूल और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं।
डिंडौरी जिले के चौरा माल गांव की प्राथमिक शाला में कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के निरीक्षण के दौरान शिक्षक कमल सिंह मरावी अनुपस्थित मिले। कलेक्टर ने स्वयं बच्चों को जमीन पर बैठकर पढ़ाया और संबंधित शिक्षक के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।
लेकिन सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि एक शिक्षक स्कूल से अनुपस्थित क्यों मिला। असली सवाल यह है कि आखिर जिले और प्रदेश की पूरी शिक्षा व्यवस्था की निगरानी कौन कर रहा है?
जब कलेक्टर के निरीक्षण में ही स्कूल से शिक्षक गायब मिल रहे हैं, तो शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी किस व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं?
72,950 शिक्षक पद खाली! सरकार के शिक्षा संबंधी दावों पर सवाल
जुलाई 2026 में मध्यप्रदेश विधानसभा से संबंधित जानकारी पर प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 72,950 शिक्षक पद रिक्त बताए गए। कुल 2,87,455 स्वीकृत पदों के मुकाबले 2,15,103 शिक्षक कार्यरत बताए गए थे।
मध्य विद्यालय स्तर पर 44,759 पद रिक्त होने की जानकारी भी सामने आई।
वहीं सितंबर 2026 में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा था कि लगभग 70 से 72 हजार अतिथि शिक्षक भी काम कर रहे हैं और अगले दो वर्षों में लगभग 18 हजार पदों पर भर्ती की जा सकेगी।
अब सवाल यह है कि नियमित शिक्षकों की कमी और अतिथि शिक्षकों पर निर्भरता के बीच बच्चों को स्थायी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिलेगी?
सरकार को सिर्फ रिक्त पदों की संख्या नहीं, बल्कि स्कूलों में वास्तविक शिक्षक उपलब्धता का भी हिसाब देना चाहिए।
102 स्कूल शिक्षकविहीन होने का दावा, मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा!
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में लोक सिंह बनाम मध्यप्रदेश शासन मामले में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी।
याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया था कि प्रदेश के 102 सरकारी स्कूल शिक्षकविहीन हैं, जबकि 499 स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।
20 जनवरी 2026 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सरकारी स्कूलों की संख्या और शिक्षक पदों की स्थिति का विवरण प्रस्तुत करने को कहा था।
यह आंकड़े याचिका में किए गए दावे हैं, इन्हें वर्तमान में सत्यापित सरकारी आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
लेकिन सवाल गंभीर है—जब सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता का मुद्दा हाईकोर्ट तक पहुंच गया, तो व्यवस्था में स्थायी सुधार की स्थिति क्या है?
7,217 से 2,269 तक एकल-शिक्षक स्कूलों का आंकड़ा
UDISE+ के आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश में एकल-शिक्षक स्कूलों की संख्या 2024-25 में 7,217 थी, जो 2025-26 में घटकर 2,269 दर्ज हुई।
यह गिरावट महत्वपूर्ण है, लेकिन सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि कितने स्कूलों में नए शिक्षक नियुक्त किए गए, कितने स्कूलों का विलय हुआ और कितने स्कूलों की श्रेणी बदली।
क्योंकि केवल आंकड़े कम होना पर्याप्त नहीं, बच्चों को वास्तव में शिक्षक मिलना जरूरी है।
कलेक्टर मैडम! एक स्कूल की कार्रवाई से पूरे सिस्टम की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती!
चौरा माल प्राथमिक शाला में शिक्षक अनुपस्थित मिले। कलेक्टर ने कार्रवाई के निर्देश दिए। लेकिन अब जनता जानना चाहती है कि क्या संबंधित बीईओ, बीआरसी और संकुल स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी?
क्या स्कूल के पुराने निरीक्षण रिकॉर्ड की जांच होगी? क्या यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित शिक्षक पहले भी अनुपस्थित रहे हैं या नहीं?
मैडम, यदि एक शिक्षक की अनुपस्थिति पर कार्रवाई हो सकती है, तो निगरानी में लापरवाही करने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच क्यों नहीं होनी चाहिए?
शराब पीकर स्कूल आने के आरोपों की जांच भी जरूरी
संबंधित शिक्षक पर शराब पीकर स्कूल आने के आरोप भी खबर में सामने आए हैं। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। आरोप प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। बच्चों के शैक्षणिक वातावरण के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
सरकार, शिक्षा मंत्री और प्रशासन से सात सीधे सवाल
- मध्यप्रदेश में शिक्षक पदों की वास्तविक कमी कितनी है और कितने अतिथि शिक्षक इन पदों पर काम कर रहे हैं?
- डिंडौरी जिले में स्वीकृत, कार्यरत और रिक्त शिक्षक पदों की संख्या क्या है?
- जिले में कितने स्कूल एकल-शिक्षक व्यवस्था से संचालित हो रहे हैं?
- चौरा माल प्राथमिक शाला की निगरानी में विभागीय स्तर पर कहां चूक हुई?
- क्या संबंधित शिक्षा अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी?
- शिक्षक भर्ती की समयबद्ध योजना और वास्तविक नियुक्तियों की स्थिति क्या है?
- क्या कलेक्टर पूरे जिले के स्कूलों की विशेष समीक्षा कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करेंगी?
अब तस्वीर नहीं, सरकार का जवाब चाहिए!
कलेक्टर मैडम, बच्चों को पढ़ाना एक दिन की पहल हो सकती है, लेकिन पूरे जिले की शिक्षा व्यवस्था को सुधारना प्रशासनिक जिम्मेदारी है।
सरकार से भी सवाल है कि जब शिक्षक पद रिक्त हैं और कई स्कूल एकल-शिक्षक व्यवस्था से जूझ रहे हैं, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावों को जमीन पर उतारने की ठोस योजना कहां है?
बच्चों के भविष्य पर सवाल खड़े हों तो जिम्मेदारी केवल शिक्षक की नहीं, पूरी व्यवस्था की जांच होनी चाहिए।
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