
“जब विकास के दावे कागज़ों और मंचों पर चमकते हों, लेकिन ज़मीन पर बच्चे दलदल से होकर स्कूल जाने को मजबूर हों, तब सवाल केवल एक सड़क का नहीं, पूरी व्यवस्था की जवाबदेही का होता है।”

अमरपुर (डिंडौरी) | विशेष संवाददाता
अमरपुर क्षेत्र में एक ओर स्कूली बच्चों को ग्राम पंचायत अमरपुर के उपसरंपच एवं भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष द्वारा कॉपी-किताबें और स्टेशनरी वितरित कर समाजसेवा का संदेश दिया जा रहा है। मंच सजे, फोटो खिंचीं और विकास की बातें हुईं। लेकिन दूसरी ओर उसी क्षेत्र की एक सड़क ने उन तमाम दावों को कठघरे में खड़ा कर दिया है, जिनमें गांवों के सर्वांगीण विकास की तस्वीर पेश की जाती है।
मुकदम टोला की सड़क पर बारिश के बाद जलभराव और गहरे गड्ढों की तस्वीरें सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहली ही बारिश में सड़क तालाब का रूप ले लेती है। पैदल चलना मुश्किल हो जाता है, दोपहिया वाहन फिसलते हैं और स्कूली बच्चों को रोज़ जोखिम उठाकर स्कूल पहुंचना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि विकास योजनाओं का उद्देश्य आम नागरिक को बेहतर सुविधाएं देना है, तो फिर आज भी गांव की बुनियादी सड़क इतनी बदहाल क्यों है? क्या विकास केवल भाषणों, कार्यक्रमों और सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित होकर रह गया है?
जनता पूछ रही है… आखिर जवाब कौन देगा?
क्या ग्राम पंचायत ने इस सड़क की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण किया?
क्या संबंधित विभाग ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता की कभी जांच कराई?
क्या जल निकासी की कोई स्थायी योजना बनाई गई?
यदि शिकायतें हुईं, तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
यदि सड़क पहले से क्षतिग्रस्त थी, तो मरम्मत समय पर क्यों नहीं कराई गई?
आखिर हर बरसात में यही तस्वीर क्यों दोहराई जाती है?
इन सवालों का जवाब केवल ग्रामीण ही नहीं, बल्कि पूरा क्षेत्र जानना चाहता है।

समाजसेवा सराहनीय, लेकिन बुनियादी सुविधाएं भी उतनी ही जरूरी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बच्चों को कॉपी-किताबें देना निश्चित रूप से एक सकारात्मक पहल है। शिक्षा को बढ़ावा देने वाला हर प्रयास स्वागत योग्य है। लेकिन यदि वही बच्चे रोज़ टूटी सड़क, कीचड़ और जलभराव से होकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हों, तो यह तस्वीर व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा केवल किताबों से नहीं, बल्कि सुरक्षित वातावरण और मूलभूत सुविधाओं से भी मजबूत होती है।
विकास की असली परीक्षा कागज़ों पर नहीं, ज़मीन पर होती है।
सरकारी योजनाओं में ग्रामीण सड़क, जल निकासी और आधारभूत ढांचे को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे में यदि सड़कें पहली बारिश में ही जवाब दे दें, तो यह स्वाभाविक है कि लोग निर्माण की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और रखरखाव पर सवाल उठाएं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत और जल निकासी की व्यवस्था कर दी जाती, तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
✅ मुकदम टोला सड़क की तत्काल मरम्मत।
✅ स्थायी जल निकासी व्यवस्था का निर्माण।
✅ सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की तकनीकी जांच।
✅ भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए प्रभावी कार्ययोजना।
✅ संबंधित विभाग द्वारा मौके पर निरीक्षण कर शीघ्र कार्रवाई।
सवाल सड़क का नहीं, जवाबदेही का है।
आज अमरपुर की यह सड़क केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि उस चुनौती का प्रतीक बन गई है जहां विकास के दावे और ज़मीनी हकीकत आमने-सामने खड़े दिखाई देते हैं।
विकास की पहचान मंचों पर दिए गए भाषणों या कैमरे की फ्लैश से नहीं होती। विकास की असली पहचान उस सड़क से होती है, जिस पर आम नागरिक, किसान, बुजुर्ग और स्कूली बच्चे रोज़ सुरक्षित चल सकें।
(संपादकीय टिप्पणी)
यह समाचार स्थानीय नागरिकों द्वारा उपलब्ध कराए गए फोटो, वीडियो एवं शिकायतों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें उठाए गए प्रश्न सार्वजनिक हित और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े हैं। संबंधित ग्राम पंचायत, जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समान प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।
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