
19 जुलाई को डिंडोरी और गाड़ासरई में लगेगा ऑर्थोपेडिक परामर्श शिविर, बड़े शहरों के इलाज तक आसान होगी पहुंच
डिंडोरी। हड्डी, जोड़ और रीढ़ की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए राहत की खबर है। अब हर छोटी-बड़ी ऑर्थोपेडिक समस्या के लिए जबलपुर, नागपुर या अन्य बड़े शहरों का रुख करने की मजबूरी कम हो सकती है। 19 जुलाई (रविवार) को डिंडोरी और गाड़ासरई में आयोजित होने जा रहे विशेष ऑर्थोपेडिक परामर्श शिविर में वरिष्ठ हड्डी एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल करपेती (एमबीबीएस, एमएस ऑर्थोपेडिक्स) मरीजों की जांच कर विशेषज्ञ परामर्श देंगे।
यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब जिले में बढ़ती उम्र, दुर्घटनाओं और जीवनशैली से जुड़ी हड्डी एवं जोड़ संबंधी समस्याओं के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञ सेवाओं की सीमित उपलब्धता के कारण लोगों को इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है, जिससे समय और आर्थिक दोनों तरह का अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
एक दिन में दो स्थानों पर विशेषज्ञ सेवा
मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शिविर का आयोजन दो स्थानों पर किया गया है।
📍 संजीवनी क्लीनिक, गाड़ासरई — सुबह 10:00 बजे से 12:00 बजे तक
📍 हेल्थ केयर क्लीनिक, समनापुर तिराहा, डिंडोरी — दोपहर 12:00 बजे से 3:00 बजे तक

किन मरीजों को मिलेगा लाभ?
शिविर में घुटनों का दर्द, कमर एवं गर्दन की समस्या, कंधे की चोट, फ्रैक्चर, स्पोर्ट्स इंजरी, लिगामेंट की चोट, आर्थ्रोस्कोपी, घुटना एवं कूल्हा प्रत्यारोपण (Replacement) सहित हड्डी एवं जोड़ रोगों से संबंधित विभिन्न समस्याओं पर विशेषज्ञ परामर्श दिया जाएगा।
आयुष्मान सहित अन्य योजनाओं का भी मिलेगा लाभ
आयोजकों के अनुसार शिविर के लिए ₹100 पंजीयन शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं आयुष्मान भारत, CGHS एवं ECHS के पात्र हितग्राहियों को नियमानुसार उपचार एवं ऑपरेशन संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
Socialnetworkingservices.in विश्लेषण
डिंडोरी जैसे आदिवासी बहुल जिले में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता हमेशा से एक चुनौती रही है। ऐसे शिविर यदि नियमित रूप से आयोजित होते हैं और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार मिलता है, तो यह स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। इससे न केवल मरीजों का समय और खर्च बचेगा, बल्कि गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार भी संभव हो सकेगा।
🔥 Socialnetworkingservices.in
“जहाँ खबर नहीं, असर दिखता है!”







