
पानी सप्लाई केंद्र के पास मछली बाजार, बगल में कूड़ादान… आखिर किसकी सोच थी यह योजना?

अमरपुर (डिण्डौरी)। ग्राम पंचायत अमरपुर में लाखों रुपये की लागत से निर्मित मछली मार्केट आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रही है। जिस उद्देश्य से इस भवन का निर्माण कराया गया था, वह उद्देश्य आज तक पूरा होता दिखाई नहीं देता। भवन जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है और उपयोग के अभाव में सरकारी धन की बर्बादी का प्रतीक बन गया है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि जिस स्थान पर लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पानी सप्लाई केंद्र बनाया गया है, उसके बिल्कुल समीप मछली मार्केट का निर्माण कर दिया गया। इतना ही नहीं, उसी परिसर के आसपास कचरा फेंकने की व्यवस्था भी दिखाई देती है। यह दृश्य कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्या निर्माण से पहले किसी ने सोचा भी था?
क्या स्थल चयन से पहले तकनीकी सर्वे किया गया था?
क्या इंजीनियरों ने यह देखा कि पानी सप्लाई केंद्र के पास इस प्रकार का बाजार बनाना उचित है या नहीं?
क्या ग्राम पंचायत ने इस निर्माण पर गंभीरता से विचार किया था?
यदि भवन उपयोगी था, तो आज वीरान और जर्जर क्यों पड़ा है?
यदि अनुपयोगी था, तो लाखों रुपये खर्च क्यों किए गए?
जनता पूछ रही है…
आखिर इस योजना का लाभ किसे मिला?
क्या जनता के टैक्स के पैसों का उपयोग इसी तरह होना चाहिए?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी निर्माण के बाद निरीक्षण किया?
जब भवन अनुपयोगी हो गया तो जवाबदेही किसकी तय होगी?
क्या सरकारी धन की बर्बादी पर कोई कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा?
अब जिम्मेदारी तय होनी चाहिए
यदि निर्माण कार्य में स्थान चयन, गुणवत्ता, योजना या क्रियान्वयन के स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जांच में जो भी अधिकारी, कर्मचारी, एजेंसी या संबंधित पक्ष जिम्मेदार पाए जाएं, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होना जनता का अधिकार है।
जनता की मांग
✅ पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए।
✅ निर्माण की गुणवत्ता, लागत और उपयोगिता का सामाजिक एवं तकनीकी ऑडिट कराया जाए।
✅ पानी सप्लाई केंद्र के आसपास स्वच्छता और स्वास्थ्य मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
✅ यदि नियमों का उल्लंघन या लापरवाही सिद्ध होती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए।
अंतिम सवाल…
क्या विकास केवल फाइलों और शिलान्यास पट्टिकाओं तक सीमित रहेगा, या जनता के पैसे से बने निर्माण वास्तव में जनता के काम भी आएंगे?
जनता जवाब नहीं, अब कार्रवाई चाहती है।
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