

अमरपुर/डिण्डौरी। एक ओर डिण्डौरी जिला जल संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश और देश स्तर पर उपलब्धियों का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर जनपद पंचायत अमरपुर के नाक के नीचे स्थित ग्राम पंचायत रामगढ़ लगातार सवालों के घेरे में है। पिछले दिनों स्टॉप डेम का पानी अचानक बहाए जाने का मामला अभी लोगों के जेहन से उतरा भी नहीं था कि अब तालाब और जल स्रोतों की बदहाली ने फिर पंचायत व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जून माह में भीषण गर्मी के दौरान मेरी नदी पर बने स्टॉप डेम में पर्याप्त जलभराव था, लेकिन 11-12 जून की दरम्यानी रात डेम का गेट खुलने के बाद बड़ी मात्रा में पानी बह गया। इसके बाद नदी में बड़ी संख्या में लोग मछली पकड़ते दिखाई दिए, जिनके फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए।
उस समय सरपंच द्वारा पुलिस चौकी में आवेदन देकर कुछ लोगों पर गेट खोलने का आरोप लगाया गया था। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि आवेदन दिया गया था, तो उसके बाद कार्रवाई क्या हुई? क्या किसी जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान हुई? क्या किसी के खिलाफ प्रकरण दर्ज हुआ? यदि नहीं, तो फिर आवेदन का परिणाम क्या निकला?
इसी बीच अब सामने आई तालाब की बदहाल तस्वीरें यह सवाल और गहरा कर रही हैं कि जल संरक्षण के दावों के बावजूद ग्राम पंचायत अपने पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण में आखिर कितनी गंभीर है। तालाब में गाद, जलकुंभी और उपेक्षा साफ दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर रखरखाव और निगरानी होती तो न स्टॉप डेम का विवाद खड़ा होता और न ही आज तालाबों की ऐसी स्थिति देखने को मिलती।
जनता पूछ रही है…
- स्टॉप डेम का पानी बहने के मामले में आखिर कार्रवाई कहां तक पहुंची?
- पुलिस चौकी में दिए गए आवेदन का क्या परिणाम निकला?
- यदि दोषी थे तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
- यदि कोई दोषी नहीं मिला तो इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
- जल संरक्षण के बड़े दावों के बीच रामगढ़ के जल स्रोत बदहाल क्यों हैं?
- क्या जनपद पंचायत अमरपुर इस पूरे मामले की समीक्षा करेगी?
ग्रामीणों ने मांग की है कि स्टॉप डेम प्रकरण और जल स्रोतों की वर्तमान स्थिति, दोनों की निष्पक्ष समीक्षा कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए ताकि ग्रामीणों के मन में उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके।
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