
अमदरी टोला में सीसी सड़क से उखड़ रहीं गिट्टियां, पूरी राशि का भुगतान; सरपंच बोले- पानी की तराई नहीं हुई! ग्रामीणों ने सरपंच-सचिव की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, प्रशासन से जांच की मांग
डिंडौरी। आदिवासी अंचल में बसा अमदरी टोला आज विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच खड़ा है। गांव में लाखों रुपये खर्च करके बनाई गई सीसी सड़क की हालत ऐसी है कि सड़क की सतह से गिट्टियां उखड़ने लगी हैं। जिस सड़क से ग्रामीणों को वर्षों तक आवागमन की सुविधा मिलनी चाहिए थी, वही सड़क अब निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रही है। लगभग 12 लाख रुपये की लागत से बनी सड़क की बदहाली ने पंचायत के निर्माण कार्यों और जिम्मेदारों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला जनपद पंचायत अमरपुर की ग्राम पंचायत अमरपुर के पोषक ग्राम अमदरी टोला का है। यहां मुख्य मार्ग से लखन के घर की ओर 15वें वित्त आयोग की राशि से लगभग 12 लाख रुपये की लागत से सीमेंट कांक्रीट सड़क का निर्माण कराया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार निर्माण कार्य 17 दिसंबर 2023 को शुरू हुआ और 2 मई 2025 को पूर्ण बताया गया।
लेकिन सड़क की वर्तमान स्थिति निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रही है। सड़क से गिट्टियां उखड़ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी यदि सड़क की ऐसी हालत है तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच होना जरूरी है।
12 लाख रुपये खर्च, पूरी राशि का भुगतान, फिर सड़क की यह हालत क्यों?
सड़क निर्माण को लेकर सरपंच रामनाथ उद्दे और सचिव प्रकाशदास सोनवानी की कार्यप्रणाली पर ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। आखिर निर्माण के समय गुणवत्ता की निगरानी किसने की? सड़क की मोटाई और सामग्री की जांच किसने की? क्या तकनीकी अधिकारियों ने मौके पर निरीक्षण किया था? यदि सड़क में निर्माण के समय ही कमी थी तो भुगतान किस आधार पर किया गया?
सरपंच का जवाब- पानी की तराई नहीं हुई, इसलिए उखड़ गई सड़क!
मामले में सरपंच रामनाथ उद्दे ने बताया कि सीसी सड़क में पानी की तराई नहीं हो पाई, जिसके चलते सड़क उखड़ गई। उन्होंने यह भी बताया कि सड़क निर्माण की पूरी राशि का भुगतान किया जा चुका है।
सरपंच के इस बयान के बाद सवाल और गंभीर हो गए हैं। यदि पानी की तराई नहीं हुई तो उसकी जिम्मेदारी किसकी थी? निर्माण कार्य की निगरानी कौन कर रहा था? क्या गुणवत्ता की जांच किए बिना ही कार्य पूर्ण मान लिया गया?
ग्रामीणों का कहना- सरपंच की राजनीतिक नजदीकियां, लेकिन गांव की समस्याओं पर कौन देगा ध्यान?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरपंच रामनाथ उद्दे की भाजपा मंडल अध्यक्ष से काफी राजनीतिक नजदीकियां हैं। ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि सरपंच राजनीतिक गतिविधियों और नजदीकियों में अधिक समय बिताते हैं, जबकि पंचायत की समस्याओं और विकास कार्यों को लेकर अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं देती।
लोगों का सवाल है कि जनप्रतिनिधि की पहली जिम्मेदारी अपने गांव और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करना है। आखिर गांव की सड़कें खराब हों, निर्माण कार्यों पर सवाल उठें और ग्रामीण परेशान हों तो उनकी सुनवाई कौन करेगा?
सचिव को पंचायत के कामों से ज्यादा ठेकेदारी की फुर्सत नहीं? ग्रामीणों ने उठाए सवाल
पंचायत सचिव प्रकाशदास सोनवानी की कार्यप्रणाली को लेकर भी स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव को पंचायत के नियमित कार्यों से ज्यादा ठेकेदारी से जुड़े कामों में व्यस्तता रहती है।
लोगों का कहना है कि यदि पंचायत सचिव ही पंचायत के कामकाज और निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं, तो गांव के विकास कार्यों की जिम्मेदारी आखिर कौन निभा रहा है?
क्या सचिव के कार्यों और दायित्वों की कभी समीक्षा होती है? क्या ठेकेदारी से जुड़े आरोपों में किसी प्रकार का हितों का टकराव है? इन सभी बिंदुओं पर प्रशासनिक जांच की आवश्यकता है।
सचिव प्रकाशदास सोनवानी से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया तो उन्होंने बाद में बात करने की बात कही और फोन काट दिया। समाचार लिखे जाने तक उनका विस्तृत पक्ष प्राप्त नहीं हुआ था।
जनपद मुख्यालय के पास ही विकास की ऐसी तस्वीर, दूरस्थ गांवों का क्या होगा?
अमरपुर जनपद मुख्यालय क्षेत्र की पंचायत में ही लाखों रुपये की लागत से बनी सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में दूरस्थ आदिवासी ग्राम पंचायतों में होने वाले निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
आदिवासी अंचल के ग्रामीणों को कागजों में विकास नहीं, बल्कि जमीन पर अच्छी सड़कें, बेहतर सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण निर्माण चाहिए।
कलेक्टर और जिला पंचायत CEO से ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों की मांग है कि अमदरी टोला की सीसी सड़क की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए। निर्माण की मोटाई, इस्तेमाल की गई सामग्री, माप पुस्तिका, बिल-वाउचर, भुगतान और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र की जांच हो। साथ ही सरपंच, सचिव और संबंधित तकनीकी अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जाए।
सचिव की कथित ठेकेदारी संबंधी व्यस्तता और संभावित हितों के टकराव की भी नियमानुसार जांच हो। यदि किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
🔴 जनता का सवाल- 12 लाख का हिसाब कौन देगा?
एक तरफ आदिवासी ग्रामीण बेहतर सड़क की उम्मीद लगाए बैठे हैं, दूसरी तरफ लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी सड़क की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरपंच पानी की तराई नहीं होने की बात कह रहे हैं और पूरी राशि का भुगतान होने की जानकारी भी सामने आ चुकी है।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब सड़क की यह हालत है तो जिम्मेदारी आखिर किसकी है? सरपंच गांव की समस्याओं का जवाब देंगे या राजनीतिक नजदीकियों की चर्चा पर ही समय बीतता रहेगा? सचिव पंचायत के कामों का हिसाब देंगे या ठेकेदारी से जुड़े आरोपों पर प्रशासन जवाब मांगेगा?
सरकारी पैसा जनता का है, किसी की निजी जागीर नहीं। आदिवासी अंचल के विकास के नाम पर खर्च हुए एक-एक रुपये का हिसाब होना चाहिए। अब अमरपुर की जनता को आश्वासन नहीं, निष्पक्ष जांच और जवाबदेही चाहिए!
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