डिंडौरी में धर्मांतरण के आरोपों ने मचाया तूफान, आदिवासी अंचल में उबाल
डिंडौरी। मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले से सामने आया कथित धर्मांतरण का मामला अब सिर्फ एक पुलिस केस नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति, प्रशासन और सामाजिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनता जा रहा है। बजाग थाना क्षेत्र के ग्राम तांतर में रहने वाले किसान राकेश कुमार बोरकर ने पड़ोसी वाहमनसिंह माण्डले पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
📌 शिकायत के अनुसार, करीब 6 महीने पहले राकेश की पत्नी संगीता बाई की तबीयत खराब हुई थी। इसी दौरान आरोपी ने इलाज और “दुआ-प्रार्थना” के नाम पर परिवार के करीब पहुंच बनानी शुरू की। आरोप है कि बीमारी और डर का फायदा उठाकर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया।
🔥 शिकायत में दर्ज आरोपों ने पूरे इलाके को हिला दिया —
▪️ “ईशु को मानोगे तो खूब पैसा मिलेगा” कहकर लालच देने का आरोप
▪️ “अगर ईशु को नहीं मानोगे तो तुम्हारी पत्नी मर जाएगी” कहकर धमकाने का आरोप
▪️ “रामायण जलाओ” और दूसरे धर्म की किताबें घर में रखने के लिए कहने का आरोप
▪️ झाड़-फूंक और दुआ-प्रार्थना के जरिए लोगों को प्रभावित करने का आरोप
⚠️ सबसे बड़ा सवाल अब यही है —
क्या आदिवासी इलाकों में गरीबी, बीमारी, अशिक्षा और अंधविश्वास को हथियार बनाकर धर्मांतरण का खेल चल रहा है?
क्या प्रशासन अब तक आंखें बंद किए बैठा था?
और अगर आरोप सही साबित होते हैं तो आखिर इसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े हैं?
🚨 पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बीएनएस की धारा 196(1)(a) और मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 की धारा 3 एवं 5 के तहत केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
📍 गौरतलब है कि डिंडौरी जैसे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में पहले भी धर्मांतरण को लेकर विवाद और शिकायतें सामने आती रही हैं। लेकिन इस बार सामने आए आरोपों ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
🛑 अब पूरा प्रदेश देख रहा है —
क्या यह मामला सिर्फ एक एफआईआर बनकर रह जाएगा?
या फिर धर्मांतरण के कथित नेटवर्क और उसके पीछे काम कर रही ताकतों तक जांच पहुंचेगी?
⚡ आस्था, संस्कृति और आदिवासी समाज की संवेदनाओं से जुड़ा यह मामला आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन सकता है।