
खैरदा उपस्वास्थ्य केंद्र में मिली गंभीर लापरवाही, 7 दिन में सुधार के आदेश; अब सवाल—क्या सिर्फ नोटिस से सुधरेगी व्यवस्था?
डिंडौरी। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावों की गुरुवार को उस समय पोल खुल गई, जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनोज पाण्डेय और जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ममता दीवान ने विकासखंड अमरपुर के आयुष्मान आरोग्य मंदिर/उपस्वास्थ्य केंद्र खैरदा का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर कमियां सामने आईं, बल्कि जिम्मेदार कर्मचारी भी ड्यूटी से नदारद मिले।
निरीक्षण के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) मनीषा भारती केंद्र से अनुपस्थित पाई गईं। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए विभाग ने तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी किया और 02 जुलाई 2026 का वेतन (अवैतनिक) घोषित कर दिया।
मामला यहीं नहीं रुका। निरीक्षण में यह भी पाया गया कि उपस्वास्थ्य केंद्र में निर्धारित मानकों के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं। इस पर मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) डॉ. सोन सिंह मरकाम तथा खंड कार्यक्रम प्रबंधक अनुराग चौकसे को भी कारण बताओ नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर सभी कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था
यह कार्रवाई कई सवाल खड़े करती है। जब जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी ही समय पर केंद्र में मौजूद नहीं हैं, तो ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं कैसे मिलेंगी? क्या यह स्थिति केवल खैरदा तक सीमित है, या जिले के अन्य उपस्वास्थ्य केंद्रों की तस्वीर भी ऐसी ही है?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि औचक निरीक्षण नहीं होता, तो यह लापरवाही शायद यूं ही चलती रहती। ऐसे में सवाल यह भी है कि नियमित मॉनिटरिंग के दावों के बावजूद इतनी बड़ी खामियां आखिर सामने कैसे आईं?
CMHO की दो टूक चेतावनी
CMHO डॉ. मनोज पाण्डेय ने स्पष्ट कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों की नियमित मॉनिटरिंग जारी रहेगी और कर्तव्य के प्रति उदासीनता पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल…
क्या कार्रवाई सिर्फ नोटिस और एक दिन के वेतन कटने तक सीमित रहेगी, या जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों का भी इसी तरह औचक निरीक्षण कर जवाबदेही तय की जाएगी? ग्रामीणों को उम्मीद है कि यह कार्रवाई केवल कागजों तक नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में वास्तविक सुधार का कारण बनेगी।
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