
डिंडौरी। एक ओर प्रशासन लगातार समीक्षा बैठकों में 100 प्रतिशत नामांकन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमरपुर जनपद शिक्षा केंद्र की जमीनी हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय जानकारी के अनुसार, अमरपुर क्षेत्र में 37 स्कूल भवन विहीन हैं। कई विद्यालय जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं, कहीं बच्चों के बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं है तो कहीं बरसात में छत से पानी टपकता है। कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी भी बनी हुई है। ऐसे हालात में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत ने अभिभावकों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।
विडंबना यह है कि हाल ही में एसडीएम स्तर पर शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को नामांकन बढ़ाने, नियमित निरीक्षण और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए। लेकिन सवाल यह है कि जब स्कूल भवन ही नहीं हैं और मूलभूत सुविधाएं अधूरी हैं, तब केवल बैठकों और निर्देशों से शिक्षा व्यवस्था कैसे सुधरेगी?
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से भवन निर्माण, शिक्षक नियुक्ति और बुनियादी सुविधाओं की मांग की जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा। यदि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण नहीं मिलेगा तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य कैसे पूरा होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल शासन और प्रशासन से है—क्या शिक्षा सुधार केवल कागज़ी बैठकों और निर्देशों तक सीमित रहेगा, या अमरपुर के इन 37 स्कूलों को भी पक्की छत, पर्याप्त शिक्षक और बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी?
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