बाबुओं का सिंडिकेट हावी? चहेतों को फायदा, बाकी कर्मचारी परेशान
डिण्डौरी | एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
जिले के स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट और पोस्टिंग को लेकर अब मामला गंभीर आरोपों तक पहुंच गया है। कर्मचारियों का कहना है कि कार्यालय, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, डिण्डौरी में बैठे बाबुओं के जरिए पूरा खेल संचालित हो रहा है, जहां बिना “सेटिंग” के कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती।
🔴 क्या है पूरा मामला?
- चहेते कर्मचारियों को मुख्यालय और सुविधाजनक पोस्टिंग
- अन्य कर्मचारियों को दूरदराज क्षेत्रों में भेजना
- फाइलों को जानबूझकर रोका या आगे बढ़ाया जाना
- मौखिक आदेशों से अटैचमेंट
- नियमों की जगह “पैसा और पहचान”
सूत्रों के अनुसार, पोस्टिंग की लिस्ट बनने से पहले ही “अंदरखाने” नाम तय हो जाते हैं।
🗣️ कर्मचारियों की जुबानी
“यहां पोस्टिंग नहीं, सौदेबाजी होती है…
बाबू तय करते हैं कि कौन घर के पास रहेगा और कौन दूर जाएगा।”
“अगर जेब भारी नहीं, तो पोस्टिंग भी मनचाही नहीं।”
लगातार हो रहे इस भेदभाव से कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
🏛️ सिस्टम पर सवाल
जब मध्यप्रदेश सरकार पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की बात करती है, तब जमीनी स्तर पर ऐसे आरोप पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं।
क्या बिना उच्च स्तर की जानकारी के इतना बड़ा खेल संभव है? या फिर सब कुछ “सिस्टम के भीतर” ही मैनेज हो रहा है?
📢 कर्मचारियों की मांग
✅ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय की जांच
✅ बाबू स्तर पर जवाबदेही तय हो
✅ सभी ट्रांसफर/अटैचमेंट ऑनलाइन और सार्वजनिक हों
✅ दोषियों पर कड़ी कार्रवाई
अगर “कार्यालय” ही खेल का केंद्र बन जाए, तो न्याय और नियम की उम्मीद किससे?
डिण्डौरी का यह मामला अब सिर्फ विभागीय नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता की परीक्षा बन गया है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस पर कार्रवाई करते हैं या फिर मामला यूं ही दबा दिया जाएगा।