अदालत बोली— ठोस सबूत पेश करने में विफल रही जांच एजेंसी
नई दिल्ली। देश की सबसे चर्चित कानूनी लड़ाइयों में शामिल दिल्ली शराब नीति मामले में बड़ा मोड़ आ गया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को CBI द्वारा दर्ज मामले में बरी कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि जांच एजेंसी आरोपों को साबित करने के लिए ठोस और निर्णायक सबूत पेश करने में नाकाम रही।
कोर्ट की इस टिप्पणी ने पूरे मामले की दिशा ही बदल दी। न्यायालय ने संकेत दिया कि केवल आरोपों के आधार पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता, बल्कि उसके लिए मजबूत प्रमाण आवश्यक होते हैं, जो इस केस में प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल मीडिया के सामने भावुक नजर आए। उन्होंने कहा,
“हमने हमेशा ईमानदारी की राजनीति की है। आज अदालत ने सच्चाई को सामने ला दिया।”
🔴 सियासत में मचा भूचाल
इस फैसले के साथ ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राजधानी से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक इस निर्णय की चर्चा शुरू हो गई है। समर्थक इसे ‘सच की जीत’ बता रहे हैं, वहीं विपक्ष की प्रतिक्रिया पर सबकी नजर टिकी हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला केवल एक कानूनी निर्णय नहीं, बल्कि आने वाले समय में राजनीतिक विमर्श को भी प्रभावित कर सकता है। लंबे समय से विवाद और आरोपों के केंद्र में रहे इस मामले का यह फैसला सियासी समीकरणों पर असर डाल सकता है।
🔎 क्यों था मामला इतना अहम?
दिल्ली की नई आबकारी नीति को लेकर शुरू हुआ यह विवाद राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था। जांच, आरोप, गिरफ्तारियां और लंबी सुनवाई के बाद आया यह फैसला अब बहस को नए मोड़ पर ले आया है।
फिलहाल इस निर्णय ने एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया, जांच एजेंसियों की भूमिका और राजनीतिक आरोपों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।