
बजाग में अधिकारियों ने ली नशामुक्ति की शपथ, लेकिन सवाल—जब गांव-गांव नशे की शिकायतें हैं, तो कार्रवाई कहां है?
डिंडौरी। एक ओर सरकारी मंचों पर ‘नशामुक्त भारत अभियान’ के तहत शपथ, हस्ताक्षर और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों से नशे और अवैध शराब की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या केवल पोस्टर, बैनर और हस्ताक्षर अभियान से नशे पर अंकुश लग जाएगा, या जमीनी स्तर पर भी ठोस कार्रवाई होगी?
गुरुवार को जनपद पंचायत बजाग परिसर में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा हस्ताक्षर अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनपद पंचायत अध्यक्ष फूलकली मरावी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी सचिन कुमार अग्रवाल, जनपद सदस्य लोकेश पटैरिया सहित अधिकारियों और कर्मचारियों ने नशामुक्त समाज का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में कहा गया कि नशा युवाओं के भविष्य, परिवार और समाज के लिए घातक है। लोगों से नशे से दूर रहने और दूसरों को भी जागरूक करने की अपील की गई।
लेकिन जनता पूछ रही है…
यदि नशामुक्ति अभियान इतने प्रभावी हैं, तो फिर ग्रामीण इलाकों में नशे की शिकायतें क्यों बनी हुई हैं? क्या केवल जागरूकता अभियान चलाना ही पर्याप्त है, या अवैध कारोबार करने वालों पर भी उतनी ही सख्ती दिखाई जाएगी?
जनता का कहना है कि नशे के खिलाफ असली लड़ाई मंचों पर शपथ लेने से नहीं, बल्कि अवैध कारोबार पर लगातार कार्रवाई, प्रभावी निगरानी और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाने से जीती जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल शासन-प्रशासन से…
क्या नशामुक्त भारत अभियान सिर्फ फोटो सेशन और हस्ताक्षर तक सीमित रहेगा, या जिले में नशे के नेटवर्क पर भी निर्णायक कार्रवाई देखने को मिलेगी?
जागरूकता जरूरी है, लेकिन जनता अब परिणाम चाहती है। नशामुक्ति के संकल्प तभी सार्थक होंगे, जब ज़मीन पर उनका असर भी दिखाई देगा।
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“जहाँ खबर नहीं, असर दिखता है!”




