
जबलपुर। मध्यप्रदेश की राजनीति में अब एक नया मुद्दा गर्मा गया है। जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश मेडिकल विश्वविद्यालय को तीन हिस्सों में बांटने के प्रस्ताव ने प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है। पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस नेता Tarun Bhanot ने इस प्रस्ताव के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री Mohan Yadav को तीखा पत्र भेजा है और तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
⚡ “जबलपुर को कमजोर करने की साजिश?”
तरुण भनोट ने सीधे शब्दों में सवाल उठाया कि आखिर क्यों लगातार जबलपुर के महत्वपूर्ण संस्थानों को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि जबलपुर की पहचान, अधिकार और वर्षों से स्थापित शैक्षणिक प्रतिष्ठा पर बड़ा हमला है।
सूत्रों के मुताबिक प्रस्ताव के तहत जबलपुर, भोपाल और उज्जैन में अलग-अलग मेडिकल विश्वविद्यालय बनाने की तैयारी चल रही है। लेकिन इस प्रस्ताव ने चिकित्सा शिक्षा जगत से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस छेड़ दी है।

🚨 “क्या प्रदेश की सबसे बड़ी मेडिकल व्यवस्था टूट जाएगी?”
पूर्व मंत्री ने अपने पत्र में साफ लिखा कि वर्तमान में जबलपुर मेडिकल विश्वविद्यालय पूरे प्रदेश की चिकित्सा शिक्षा को एकीकृत ढंग से संचालित कर रहा है। परीक्षा प्रणाली, संबद्धता, प्रशासनिक समन्वय और शैक्षणिक गुणवत्ता एक ही व्यवस्था के तहत नियंत्रित होती है। ऐसे में विश्वविद्यालय का विभाजन प्रदेश की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि:
➡️ प्रशासनिक खर्च कई गुना बढ़ेगा
➡️ नए भवनों और संसाधनों पर करोड़ों का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा
➡️ शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है
➡️ प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों में समन्वय कमजोर होगा
🔥 “फैसला नहीं, पहले चर्चा हो”
तरुण भनोट ने मांग की कि इतने बड़े फैसले से पहले चिकित्सा विशेषज्ञों, मेडिकल कॉलेजों, शिक्षकों, छात्रों और जनप्रतिनिधियों से व्यापक चर्चा कराई जाए। उन्होंने कहा कि बिना विशेषज्ञ समिति और जनपरामर्श के कोई अंतिम निर्णय लेना प्रदेशहित में नहीं होगा।
💥 सियासी गलियारों में चर्चा तेज
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक रूप ले सकता है। जबलपुर लंबे समय से प्रदेश की प्रशासनिक और शैक्षणिक पहचान का केंद्र रहा है। ऐसे में मेडिकल विश्वविद्यालय के विभाजन को लेकर क्षेत्रीय असंतोष बढ़ना तय माना जा रहा है।
📌 अब बड़ा सवाल यही है — क्या सरकार इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करेगी?
या फिर जबलपुर एक और बड़ा संस्थान खोने की कगार पर है?
⚠️ फिलहाल इस पत्र ने प्रदेश की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।
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“जहाँ खबर नहीं, असर दिखता है!”


